• कंपेन में तिब्बती भिक्षुओं को चीन के प्रति आभार प्रकट करने का आदेश दिया गया

    तिब्बतनरिव्यू.नेट, 11 अप्रैल, 2019

    तिब्बत की राजधानी ल्हासा के सेरा मठ में एक नया अभियान चल रहा है, जिसमें भिक्षुओं को चीनी कानूनों का सख्ती से पालन करने और देश में चल रही धर्मनिरपेक्ष-धर्म नीति को ध्यान में रखते हुए ‘अलगाववाद के खिलाफ एक स्टैंड’ लेने का आदेश दिया गया है। तिब्बती सेवा की rfa.org ने आधिकारिक चीनी मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए यह रिपोर्ट दी है।

    रिपोर्ट में मठ प्रबंधन समिति के सरकार द्वारा नियुक्त निदेशक, लखपा त्सेरिंग का हवाला दिया गया है। उन्होंने एक न्यूज कांफ्रेंस में 13 मार्च को बताया था कि ‘अलगाववाद के खिलाफ खड़ा होना’ भिक्षुओं की धार्मिक साधना में आस्था जताने का आधार होना चाहिए। त्सेरिंग ने सम्मेलन में उपस्थित 320 श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘भिक्षुओं को चीनी सरकार के प्रति आभार प्रकट करना चाहिए और देश के कानूनों का पालन करके देश के प्रति अपनी निष्ठा दिखानी चाहिए।’ इस सम्मेलन में भिक्षु, प्रबंधन कर्मचारी, पुलिस अधिकारी और सुरक्षा दल के सदस्य शामिल थे।

    सेरा में सरकार द्वारा नियुक्त प्रबंधन अधिकारी त्सेटन दोरजे ने फरवरी में लागू किए गए ‘20 निषेध’ के एक सेट को वहां फिर से दिखाया, जो उपस्थित श्रोताओं को वीचैट और वीबो जैसे लोकप्रिय मीडिया प्लेटफार्मों पर पोस्टिंग में इन प्रतिबंधों का पालन करने के लिए याद दिलाता है। वह चाहते थे कि वे इस बात का ख्याल रखें कि सरकार या राजनीतिक रूप से संवेदनशील मानी जाने वाली अन्य सामग्रियों या सूचनाओं को प्रचारित- प्रसारित न करें। और मठ की मीडिया और शिक्षा समिति के सरकार द्वारा नियुक्त निदेशक जम्पा केलसांग ने सभा में कहा कि तिब्बत में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के प्रति निष्ठा और प्रेम के साथ हमेशा ‘चीन की उदारता को चुकाने’ का आह्वान किया गया है।

    चीन के आधिकारिक Globaltimes.cn ने इससे पहले 26 मार्च को ही यह रिपोर्ट दी थी कि तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में 30,000 से अधिक बौद्ध भिक्षुओं और भिक्षुणियों की 25 मार्च को कानून और नियमों के बारे में उनकी जानकारी की परीक्षा ली गई थी। इसका उद्देश्य उनकी कानूनी जागरूकता और चेतना को बढ़ाना था। लेकिन प्रचार प्रसार के बहाने, असल में बौद्ध समुदाय की चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और उसके द्वारा संचालित राज्य के प्रति वफादारी और देशभक्ति की जांच की गई थी।

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