• चीन को समझने की कुंजी तिब्बत में है: पैन-यूरोपीय विश्वविद्यालय में सीटीए अध्यक्ष

    तिब्बत.नेट, 12 अक्तूबर, 2018

    ब्रातिस्लावा। निर्वासित तिब्बती सरकार के राष्ट्रपति डॉ लोबसांग सांगेय ने 11 अक्तूबर को स्लोवाकिया के पैन-यूरोपीय विश्वविद्यालय में तिब्बत और चीन पर एक वार्ता में शिरकत की। सीटीए राष्ट्रपति को विश्वविद्यालय के मास मीडिया संकाय द्वारा आमंत्रित किया गया था। इस वार्ता का संचालन पैन-यूरोपीय विश्वविद्यालय के वाइस डीन डॉ यवोन्ना वावरोवा ने किया।

    राष्ट्रपति डॉ सांगेय ने अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टरों की “तिब्बत को सीरिया के बाद दुनिया की सबसे कम आजादी वाले देश की श्रेणी में डालनेवाली रिपोर्टों का हवाला देते हुए तिब्बत के अंदर की स्थिति का वर्णन किया। उन्होंने साथ-साथ फ्रीडम हाउस और अन्य आधिकारिक रिपोर्टों के बारे में भी बताया।

    राष्ट्रपति सांगेय ने आगे कहा कि चीन की प्रचार मशीनें जैसे सीसीटीवी और सिन्हुआ समाचार तिब्बत की समृद्धि और विकास पर कहानियां रही हैं। सीसीटीवी अब अफ्रीका में सबसे ज्यादा देखे जाने वाले चैनलों में से एक है और लैटिन अमेरिकी देशों में इसकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। उन्होंने यह भी उद्धृत किया कि उन्होंने एक बार भारतीय समाचार पत्र में चार पेज के चीन से प्रचार से भरे विज्ञापन को पढ़ा था जिसमें यह प्रचार किया गया था कि कैसे चीन ने तिब्बत को सामंतवाद से कैसे मुक्त कराया, उन्हें सभ्य बनाया और कैसे तिब्बती पठार चीनी नेतृत्व में समृद्ध हो रहा है।

    उन्होंने कहा, ‘इसलिए मूल रूप से चीन इस प्रचार को फैलाने में बड़ी राशि खर्च कर रहा है। उसके पास इस तरह की शक्ति और प्रभाव है कि यह कुछ देशों में कार्यालयों के शीर्ष स्तर तक पहुंच गया है। इसलिए, हमारे पास सच्चाई है लेकिन यह हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है।’
    राष्ट्रपति सांगेय ने तिब्बत के अंदर गंभीर स्थिति का वर्णन किया और यह भी बताया कि कैसे चीन के दमनकारी शासन के विरोध में 152 तिब्बतियों ने आत्मदाह कर लिया है। उन्होंने कहा कि इस ‘आत्मदाह विरोध’ को अंतरराष्ट्रीय मीडिया में बहुत कम कवरेज मिला है क्योंकि चीन पत्रकारों को तिब्बत में प्रवेश करने, वहां से समाचार संकलन करने और शोध करने से रोकता है। यहां तक कि चीन में भी, पत्रकारों के उत्पीड़न के मामले सामने आए हैं।“

    उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि चीन कैसे यूरोप और अन्य जगहों पर “संभ्रांत समाज को अपने वश“ में किया है। उन्होंने कहा, “चीन ने उन संभ्रांत वर्ग को रिश्वत दिया, उन्हें खरीदा और उनकी दिमागी सफाई की है, जिसके बदले में इस वर्ग ने चीन के लिए जरूरी सेवाओं को उन्हें प्रदान किया है।“

    उन्होंने कहा, “तिब्बत मुद्दा न केवल साठ लाख तिब्बतियों का मुद्दा है बल्कि यह पूरी दुनिया से संबंधित है।“ राष्ट्रपति सांगेय ने वन बेल्ट वन रोड की चीनी पहल का उल्लेख किया जो राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सबसे बड़ी परियोजना है। यह पहल चीन की तिब्बत में शुरू की गई एक सड़क परियोजना के समान है, जिसका निर्माण तिब्बत में समृद्धि के नाम पर किया गया था। इसमें तिब्बतियों को चांदी का सिक्का दिया जाता था और अंत में इसी सड़क के माध्यम से चीन ने तिब्बत पर कब्जा कर लिया। राष्ट्रपति सांगेय ने कहा, “यह आपके साथ भी हो सकता है।“

    डॉ सांगेय ने मैरियट होटल और मर्सिडीज बेंज की हालिया घटनाओं का उल्लेख किया जिसे चीनी आक्रामकता का सामना करना पड़ा और बताया कि अब कैसे चीनी प्रभाव हर जगह है। उन्होंने छात्रों से सवाल किया, “क्या आप ऐसा ही चाहते हैं? जब आप पत्रकारों के रूप में अपना करियर शुरू करेंगे तो क्या आप सेंसर में रहना और धमकी सहना पसंद करेंगे? “

    इसके बाद राष्ट्रपति सांगेय ने दुनिया के लिए तिब्बत के महत्व पर जोर दिया और बताया कि तिब्बती संस्कृति का समर्थन कैसे पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद है और उद्धृत किया कि कैसे तिब्बती भाषा में बुद्ध की शिक्षाओं का भंडार है। उन्होंने छात्रों द्वारा उठाए गए कई प्रश्नों का भी उत्तर दिया और तिब्बती मुद्दे पर रुचि दिखाने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।

    ब्रातिस्लावा के बाद, राष्ट्रपति सांगेय का अगला पड़ाव फिनलैंड होगा।

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