• चीन तिब्बती पहचान के मूल को ही नष्ट करना चाहता है- जर्मन संसद में दलाई लामा के पूर्व दूत ने कहा

    सेवतिब्बत.ओआरजी, 8 मई, 2019

    यूरोप में परमपावन दलाई लामा के पूर्व विशेष दूत रहे केलसांग ग्यालत्सेन ने बर्लिन में जर्मन बुंडेस्टाग में 8 मई, 2019 को एक सुनवाई के दौरान कहा कि चीन तिब्बती पहचान के मूल को नष्ट करना चाहता है और तिब्बती संस्कृति और धर्म को राज्य द्वारा अनुमोदित और नियंत्रित संस्करण में बदलना चाहता है।

    बुंडेस्टाग की कमेटी ऑन ह्यूमन राइट्स एंड ह्यूमैनिटेरियन एड में ‘धार्मिक स्वतंत्रता : चीन में धार्मिक अल्पसंख्यकों की मानवाधिकारों की स्थिति’ नामक एक सुनवाई में ग्यालत्सेन, तिब्बती बौद्ध धर्म की स्थिति पर एक विशेषज्ञ के रूप में बोल रहे थे।

    ग्यालत्सेन ने दलाई लामा के उत्तराधिकार के मुद्दे पर भी बात की और कहा कि चीन के पास इसका निर्णय करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि जर्मन राजनेताओं को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे चीनी सरकार द्वारा थोपे गए दलाई लामा को स्वीकृति नहीं देंगे।

    उन्होंने ‘पार्टी कैडरों, पुलिस और प्रौद्योगिकी द्वारा मठों की व्यापक निगरानी’ और ‘धार्मिक और सुरक्षा कानूनों, जो लगभग हर धार्मिक गतिविधि को अधिकारियों की अनुमति पर निर्भर करते हैं’, की आलोचना की। उन्होंने ‘मंदिरों में दर्शन को प्रतिबंधित करने, मठ के स्कू्लों को बंद करने, दलाई लामा की निंदा करने और उन तिब्बती लोगों को लंबी कैद की सजा देने का भी उल्लेख किया जो सार्वजनिक रूप से दलाई लामा की पूजा करते हैं। ग्यालत्सेन ने कहा, ‘ये दमनकारी उपाय व्यापक और कठोर वैचारिक अभियानों के साथ हैं’।

    बुंडेस्टाग गुटों की ओर से आई एक प्रश्नावली के जवाब में ग्यालत्सेन ने जर्मन नीति निर्माताओं से कहा कि उन्हें  चीन और चीनी सरकार के साथ द्विपक्षीय, बहुपक्षीय, सार्वजनिक और गैर सार्वजनिक स्तर पर ‘मानवाधिकारों के मुद्दे और तिब्बतियों और उइगर जैसे धार्मिक और जातीय समूहों के अधिकारों जैसे मुद्दों को समझना और उठाना चाहिए, जो चीन के साथ उनके संबंधों का केंद्रीय तत्व है।‘

    उन्होंने कहा कि तिब्बती, उइगर, मंगोल आदि की स्थिति अंतर्राष्ट्रीय कानूनी मानदंडों के प्रति चीनी सरकार के अनादर और शांतिपूर्ण संघर्ष समाधान के सिद्धांतों का पालन करने के प्रति अनिच्छा का संकेत है। उन्होंने सुझाव दिया कि तिब्बत और अन्य क्षेत्रों की स्थिति का जर्मन राजनीति द्वारा विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

    तिब्बत के बारे में ग्यालत्सेन ने कहा कि जर्मन नीति निर्माताओं को बिगड़ती हुई मानवाधिकारों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए और बदलाव का आह्वान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जर्मन सरकार को चीनी सरकार से दलाई लामा के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत फिर से शुरू करने का आह्वान करना चाहिए।

    इसके अलावा ग्यालत्सेन ने कहा, दलाई लामा के उत्तराधिकार के बारे में जर्मन सरकार की स्थिति महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस तरह का निर्णय चीनी सरकार या चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के हस्तक्षेप के बिना, पूरी तरह से स्वतंत्र और स्व-निर्धारित तरीके से तिब्बती बौद्ध धर्म के संस्थानों द्वारा लिया जाना है।

    बुंडेस्टाग की सुनवाई में गवाही देने वाले अन्य लोगों में शामिल थे- सोसाइटी फॉर थ्रेटेंड पीपल के उलरिक डेलस, जर्मनी के ह्यूमन राइट्स वॉच के निदेशक वेन्ज़ेल माइकेल्स्की, वर्ल्ड उइगुर कांग्रेस के अध्यक्ष डॉल्कुन ईसा और मर्केर इंस्टीट्यूट ऑफ चाइना स्टडीज के प्रो. फ्रैंक एन. पाइके।

    Categories: मुख्य समाचार, समाचार

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *