• तिब्बती भारतीय संस्कृति के अंग

    जयपुर (एजेंसी)। राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह शोखावत का मानना है कि तिब्बत के निवासी यधपि शारणार्थि के रुप में भारत में रह है लेकिन यहां की संस्कृति में वह इतने घुल मिल गए है कि अब भारतीय संस्कृति के अंग ही प्रतीत होते है। श्री शेखावत आज यहां तिब्बती शरणार्थी वूलन स्वेटर एण्ड रेडिमेड विक्रेता संघ द्वारा आयोजित दलाई लामा को मिले विश्व शांति नोबल पुरस्कार प्राप्ति् की 21 वीं वर्षगांठ समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज का दिन अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिये संघर्ष कर रहे तिब्बती भाई बहन मानव अधिकार दिवस के रुप में मनाते है । विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि संस्कृति और परंपरा राष्ट्र की पहचान होती है । तिब्बती भाई बहन अपनी सामाजिक , राष्ट्रीय और सांस्कृतिक परंपराओं के लिए अपनी अलग पहचान रखते है और चीन उन्ही परंपराओं का दमन कर रहा है । उन्होंने दलाई लामा के नेतृत्व में तिब्बती शरणार्थियों द्वारा स्वाधीनता के लिए किये जा रहे इस शांतिप्रिय आंदोलन को नमन करते हुए कहा कि इस संघर्ष भी महात्मा गांधी के बताए अहिंसा , सदभाव, प्रेम और शांति की राह पर चलने वाला आजादी का संघर्ष है। उन्होंने कहा कि समाज में अमन चैन , भाईचारा और प्रेम की गंगा बहाने वालों की राह बहुत कठिन होती है । मन से सहिष्णु और करुणा से परिपूर्ण तथा तन से हाडतोड मेहनत करने वाले तिब्बतियों की भी यही व्यथा कथा है।

    Categories: तिब्बत पर भारतीय नेताओं के विचार, समाचार

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