• तिब्बत पर केंद्र अपनी नीति स्पष्ट करेः अग्निहोत्री

    दैनिक जागरण, मई 07, 2016

    hqdefaultराज्य ब्यूरो, जम्मूः हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति और भारत-तिब्बत सहयोग मंच के कार्यवाहक प्रधान डॉ. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री ने शुक्रवार कहा कि तिब्बत को लेकर सरकार अपनी नीति स्पष्ट करे। तिब्बत सीमा पर रोड नेटवर्क को मजबूत बनाया जाए। अरुणाचल प्रदेश भारत का हिस्सा है। इसको लेकर भारतीय पक्ष कमजोर नहीं होना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि भारत सरकार तिब्बत को चीन का स्वायत हिस्सा मानती है, लेकिन चीन के तिब्बत को अपने कब्जे में लेने के बाद भारतीय सीमा सुरक्षित नही रही है। चीन ने जब तक तिब्बत पर हमला नहीं किया था, तब तक भारतीय सीमा सुरक्षित थी। तिब्बत के प्रति देश के लोगों की जानकारी कम हो रही है। इसलिए मंच जागरूकता अभियान चला रहा है, जिसमें तिब्बत को चीन से मुक्त करवाने का संकल्प लिया जाता है। तिब्बत की समस्या अहम मुद्दा है। भारत की सीमा पहले लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, नेपाल व उत्तर-पूर्वी राज्यों के साथ तिब्बत से लगती थी, लेकिन वर्ष 1959 में चीन ने तिब्बत पर कब्जा कर लिया। उसके बाद यह सीमा चीन से लगने लगी और उत्तरी सीमा असुरक्षित हो गई।

    उन्होंने कहा कि केंद्र में नई सरकार आने के बाद जमीनी सतह पर नीति में बदलाव हुआ है, लेकिन अभी भारत तिब्बत को चीन का स्वायत्त हिस्सा मानता है। रोड व रेल नेटवर्क मजबूत करने की जरूरत है। चीन ने तो तिब्बत के ल्हासा तक रेलवे व रोड नेटवर्क फैला दिया है, लेकिन वर्ष 1962 में चीन के भारत पर हमले के बाद भी भारत ने उत्तर पूर्वी सीमा तक रोड नेटवर्क नहीं बढ़ाया।

    भारत तिब्बत सहयोग मंच की ओर से हर वर्ष तवांग यात्रा आयोजित की जाती है। इस यात्रा को लेकर देश में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। डॉ. अग्निहोत्री ने कहा कि इस यात्रा का कई बार चीन ने विरोध किया है, लेकिन हम यात्रा को ले जाते है। इसमें विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को भेजना चाहिए। भारत को अरुणाचल प्रदेश के मामले में अपना पक्ष कमजोर नहीं करना चाहिए। एक बार तवांग में जब दलाई लामा पहुंचते तो चीनन के विरोध के बाद भारत सरकार ने उन्हें पत्रकार वार्ता नहीं करने दी। इससे लोगों के बीच असमंजस पैदा होता है। इस बार नवंबर में यात्रा जा रही है।

    भारत तिब्बत सहयोग मंच पूरे देश में सेमिनार व अन्य कार्यक्रम करवा कर जागरूकता फैलाता है। मंच का गठन 1999 में किया गया था। मंच तवांग यात्रा के प्रति भी जागरूकता फैला रहा है।

    बीजिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि दलाई लामा हमारे सम्मानित अतिथि हैं। प्रत्यक्ष रुप से भले ही भारत की नीति में बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन मौजूदा केंद्र सरकार रोड नेटवर्क खड़ा करने के लिए प्रभावी कदम उठा रही है। डॉ. अग्निहोत्री ने कहा कि मैं केंद्र सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहरा रहा हूं, लेकिन दो-तीन वर्षो से जमीनी स्तर पर काम हो रहा है।

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