• तिब्बत में चीन द्वारा प्रायोजित विकास

    रिनजिन दोरजी, तिब्बत नीति संस्थान

    डॉ रिनज़िन दोरजी

    तिब्बत में चीन द्वारा किए जा रहे विकास को विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने अपने-अपने ढंग से परिभाषि‍त किया है और उनका नामकरण किया है। जैसे कि मास्टर्स गिफ्ट, बूमरैंग विकास, रक्त-प्रवाह से विकास, लगया विकास, मेंढक- छलांग विकास आदि- आदि। तिब्बत में आर्थिक विकास को भी देखा जाता है, एक अभियांत्रिकी विकास, जिसे चीनी सरकार ने कुशल तरीके से जानबूझकर तिब्बतियों को प्राकृतिक रूप से या स्वाभाविक रूप से लाभ होनेवाले विकास के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों को पूरा करने के लिए सुव्यवस्थित रूप से किया है।

    तिब्बत में चीन की आर्थिक विकास नीतियों को कई चीजों के लिए प्रस्तावित किया गया है। उदाहरण के लिए, आर्थिक विकास की नीतियां न केवल आय और तिब्बतियों के जीवन स्तर में सुधार लाने के उद्देश्य से हैं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भी हैं। तिब्बत ने वर्षों में जो उच्च आर्थिक विकास दर हासिल की है, वह पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के नियम और नियंत्रण को वैध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    जेएनयू के एक शोध छात्र डोलमा त्सेरिंग के अनुसार, तिब्बत पर विशेष रूप से जब अंतरराष्ट्रीय आलोचना होती है तो तिब्बत पर चीन के कई श्वेत पत्रों का मुख्य विषय पीआरसी के तहत तिब्बत के आर्थिक विकास पर होता है।

    चीन के लिए उसकी सीमाई देशों के साथ संबंध रखने में तिब्बत एक रणनीतिक महत्व रखता है। Tsarist रूस और ग्रेट ब्रिटेन के लिए तिब्बत एक खेल का मैदान था। जॉर्ज गिंसबर्ग और माइकल माथोस ने अपने कार्यों में तिब्बत के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला है: “जो तिब्बत पर आधिपत्य रखता है वह हिमालयी पिडमॉन्ट (एक सतही ढलान जो पहाड़ के आधार से समतल भूमि तक जाती है।) पर हावी रहता है, जो हिमालयी पि‍डमोंट पर हावी है, वह भारतीय उपमहाद्वीप को धमकी दे सकता है, और जो भारतीय उपमहाद्वीप को धमकी दे सकता है, उसकी दक्षिण एशिया और उसके साथ पूरे एशिया में अच्छी पकड़ बन जाती है।’ चीन का हाल के वर्षों में वन बेल्ट और वन रोड (ओबीओआर) को शुरू करने के हथकंडे को इसी रणनीति के हिस्सें के तौर पर देखा जा सकता है। जब चीनी कम्युनिस्ट सैनिकों ने पूर्वी तिब्बत पर कब्जा कर लिया तो सड़क निर्माण की परियोजनाएं तुरंत शुरू हो गईं। दो दशकों से अधिक के लिए रणनीतिक विकास और 1950 से 1976 तक तिब्बत में समग्र विकास के शानदार पहलू, सभी रणनीतिक या सैन्य उद्देश्यों  से प्रेरित रहे हैं।

    इसलिए, तिब्बत में सड़क निर्माण, हवाई अड्डों के निर्माण और रेलवे लाइनों के बुनियादी ढाँचे का विकास सभी अलग-थलग और रणनीतिक स्थानों को जोड़ने के लिए लगातार किया जाता है। इस विकास का उद्देश्य तिब्बती लोगों पर कुशल निगरानी रखना और तिब्बत की सीमाओं की सुरक्षा करना है।

    चीनी सरकार शी जिनपिंग की इस प्रमुख सोच पर चल रही है कि ‘देश को अच्छी तरह से संचालित करने के लिए हमें सबसे पहले सीमाई क्षेत्रों को अच्छी तरह से नियंत्रित करना चाहिए, और सीमाओं को अच्छी तरह से नियंत्रित करने के लिए हमें पहले तिब्बत में स्थिरता सुनिश्चित करनी चाहिए।‘ इसलिए, यह रणनीतिक दृष्टिकोण से तिब्बत के महत्व को और अधिक मान्य करता है और तिब्बत में चीन के इंजीनियर विकास के सच्चे इरादे को प्रकट करता है। तिब्बत के पिछले दरवाजे से विदेशी घुसपैठ की आशंका से चीन भी सामरिक विकास के लिए प्रेरित हुआ है। इसलिए दोतरफा युद्ध, तिब्बत में विदेशी घुसपैठ और चीनी सरकार के शासन के खिलाफ तिब्बती प्रतिरोध से बचने के लिए चीन को एक इंजीनियर विकास के माध्यम से तिब्बत में स्थिरता को सुरक्षित करने की आवश्यकता है।

    हालांकि, तिब्बत में स्थिरता स्थापित करने का काम इतना आसान नहीं है। एड्रियन ज़ेनज़ के अनुसार, ‘2008 के बाद से तथाकथित तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (टीएआर) में प्रति व्यक्ति घरेलू सुरक्षा व्यय’ अन्य सभी प्रांतों और क्षेत्रों के मुकाबले सबसे अधिक है। ‘2016 में सिचुआन के तिब्बती क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति घरेलू सुरक्षा व्यय पूरे सिचुआन प्रांत की प्रति व्यक्ति घरेलू सुरक्षा व्यय से लगभग तीन गुना अधिक थी। इसलिए, तिब्बत में स्थिरता का स्रोत घरेलू सुरक्षा खर्च बढ़ रहा है।

    तिब्बत में इस बनावटी विकास ने तिब्बती लोगों के बीच अलगाव को बढ़ावा दिया और पीडि़‍त होने की भावना को और गहरा कर दिया। ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर त्सेरिंग शाक्य निम्नलिखित विचारों में तिब्बत में राजनीतिक रूप से प्रेरित विकास के प्रभावों पर प्रकाश डालते हैं:

    अलगाववादी समस्या का सामना करने वाले सभी देशों की सरकारें एकसमान रूप से दो रणनीतियों पर काम करती हैं- स्थानीय आबादी को नियंत्रित करने के लिए उनपर निगरानी बढ़ा देती हैं और सहयोग और अनुपालन को प्रेरित करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों के लिए खजाना खोल देती है। ये नीतियां समस्याग्रस्त हैं, क्योंकि बढ़ा हुआ आर्थिक विकास इसके लिए अधिक स्वीकृति नहीं देता है और आंदोलन पर प्रतिबंध के लिए अधिक निगरानी और सांस्कृतिक उत्पादन को नियंत्रित करने से तिब्बती उत्पीड़न की गहरी पीड़ा और आक्रोश पैदा होता है।

    चीनी शासन में लगभग 160 तिब्बतियों ने तिब्बत में आत्मदाह कर लिया है। यह साबित करता है कि तथाकथित विकास जमीन पर नहीं हो रहा है और वास्तव में यह तिब्बती लोगों के दमन और उत्पीड़न के बढ़ते उपकरणों के लिए एक और उत्प्रेरक बना हुआ है।

    तिब्बत की उच्च विकास दर चीन के निवेश पर निर्भर है। यह बीजिंग से और अधिक वित्तीय सब्सिडी द्वारा और बढ़ गई है। प्रोफेसर जिन वी ने ध्यान दिलाया है कि तिब्बत के समाज और अर्थव्यवस्था के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने वाले खर्च का 90% बोझ केंद्र सरकार के राजकोषीय अनुदान पर निर्भर करता है।

    तिब्बत में चीन का भू-रणनीतिक बुनियादी ढांचा विकास भी तेजी से शहरीकरण के साथ हो रहा है। तिब्बत में (और देश भर में) चीन का शहरीकरण करने का उद्देश्यह चीन की धीमी अर्थव्यवस्था के समाधान करना है। इस नीति का उद्देश्य लाखों चीनी प्रवासी श्रमिकों को तिब्बत में बसने और व्यापार करने के लिए लाना है। इस प्रक्रिया के हिस्से के रूप में तिब्बत के शहर जनसांख्यिकीय बदलावों से गुजर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप चीनी संस्कृति का जबर्दस्त आगमन हो रहा है। आने वाले कुछ दशकों में तिब्बत में 30 प्रतिशत शहरीकरण की अनुमानित दर का मतलब यह होगा कि तिब्बत के सभी शहरों में चीनी मूल के लोगों का प्रभुत्व होगा।

    संक्षेप में, तिब्बत में चीनी सरकार के प्रायोजित बनावटी विकास तिब्बती लोगों के बीच कानून के प्रति भक्ति को बनाए रखने के लिए और सुरक्षा-केंद्रित है। इसका उद्देश्य चीन की क्षेत्रीय और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। हालांकि, किस हद तक चीनी सरकार तिब्बत में अर्थव्यवस्था को विकसित करने के लिए सीमित लाभ के साथ निवेश करती है, या दूरदराज में रहनेवाले तिब्बतियों को कितना मिल पाता है, यह देखनेवाली बात है। इतना तय है कि तिब्बती अपने क्षेत्रीय अधिकारों की भावना को कभी नहीं छोड़ेंगे।

    पिछले साठ वर्षों में तिब्बत में बुनियादी ढांचे के विकास में चीनी सरकार का निवेश देखने लायक है। जबकि, उसी कालावधि में तिब्बत में इस प्रायोजित विकास ने चीनी औपनिवेशिक शासन के खिलाफ तिब्बती प्रतिरोध को उकसाया है।

    * डॉ रिनज़िन दोरजी तिब्बत पॉलिसी इंस्टीट्यूट में एक रिसर्च फेलो हैं। यहां व्यक्त किए गए उनके विचार तिब्बत पॉलिसी इंस्टीट्यूट के सिद्धांतों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। लिंक हेतु यहाँ क्लिक करें।

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