• निर्वासित तिब्बत संसद के सदस्यों ने विश्व सांसदों के 7वें सम्मेलन में भाग लिया

    तिब्बत.नेट, 9 मई, 2019

    धर्मशाला। तिब्बत पर लातवियाई संसदीय सहायता समूह और सांसदों के अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क के साथ निर्वासित तिब्बती संसद ने तिब्बत पर चार दिवसीय 7वें विश्व सांसद सम्मेलन का आयोजन किया। लाटविया के रीगा में यह सम्मेलन 7 से 10 मई 2019 तक आयोजित हुआ।

    सम्मेलन में ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फ्रांस, रोमानिया, कनाडा, चेक गणराज्य, लिथुआनिया, भारत, नेपाल, चिली, लातविया, ब्रिटेन और स्कॉटलैंड के 25 संसद सदस्यों सहित लगभग 100 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

    केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) के राष्ट्रापति डॉ लोबसांग सांगेय, स्पीकर पेमा जुंगनी और डिप्टी स्पीकर आचार्य येशी फुंटसोक के साथ-साथ निर्वासित तिब्बत व संसद के सदस्य, परमपावन 14वें दलाई लामा के प्रतिनिधि, उत्तर अमेरिका, बेल्जियम, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, जिनेवा और फ्रांस के तिब्बत कार्यालयों, अंतर्राष्ट्रीय तिब्बत नेटवर्क के निदेशक, एनईडी के अध्यक्ष और एशिया कार्यक्रम अधिकारी, फ्रीडम हाउस के अध्यक्ष, आईसीटी जर्मनी के कार्यकारी निदेशक, आईसीटी यूरोप के कार्यकारी निदेशक, आईसीटी वाशिंगटन डीसी के अध्यक्ष, आईसीटी यूरोप के एडवोकेसी और संचार निदेशक, आईसीटी यूरोप के यूरोपीय संघ के नीति निदेशक, अध्यक्ष, क्रेधा और अंतर्राष्ट्रीय कानून के प्रोफेसर आदि ने सम्मेलन में भाग लिया।

    7 मई 2019 को तिब्बत के लिए लातवियाई संसदीय सहायता समूह ने एक रात्रिभोज का आयोजन किया, जिसके बाद तिब्बत के लिए लातवियाई संसदीय सहायता समूह के उपाध्यक्ष माननीय उल्दीस बुदरिकिस द्वारा स्वागत भाषण दिया गया। इसके बाद लातवियाई कल्चरल ग्रुप द्वारा रीगा के रेस्तरां बेलवेस्ट्यू में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।

    उद्घाटन सत्र 8 मई को आयोजित किया गया, जिसमें तिब्बत के लिए लातिविया संसदीय सहायता समूह के उपाध्यक्ष माननीय उल्दीस बुदरिकिस ने परिचयात्मक भाषण दिया। निर्वासित तिब्बत संसद के अध्यक्ष माननीय पेमा जुंगनी का संबोधन हुआ। इसके बाद अमेरिका के प्रतिनिधि सभा के सदस्य जिम मैकगवर्न का एक विशेष वीडियो संदेश दिखाया गया तथा अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैन्सी पेलोसी का भाषण पढ़ा गया।

    उद्घाटन समारोह की प्रमुख विशेषता परमपावन दलाई लामा के एक विशेष वीडियो संदेश का प्रसारण रहा। इसके बाद, मुख्य अतिथि माननीय एंडिस बुइकिस द्वारा मुख्य भाषण प्रस्तुत किया गया। एक सोसाइटी ‘लातवियाई फॉर तिब्बत’ के प्रमुख और इस सम्मेलन के संयोजक जेनिस मार्टिन स्कुजा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। सत्र के ‘मास्टर ऑफ सेरेमनी’ प्रोफेसर तूफ़िक कवर रहे।

    ब्रीफिंग सेशन की अध्यक्षता भारत के सांसदों- माननीय प्रदीप टम्टा और माननीय रिपुन बोरा ने की और सीटीए के राष्ट्रपति डॉ लोबसांग सांगेय ने सत्र को संबोधित किया।

    अधिवेशन का दूसरा दिन क्रेधा के अध्यक्ष और अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अंतर्राष्ट्रीय कानून के प्रोफेसर माइकल वॉन वॉल्ट प्राग ने सत्र की अध्यक्षता की और तिब्बत के मुद्दों को संयोजित रूप में रखा।

    इसके बाद डॉ मुनिन चेन द्वारा चाइना-तिब्बत हिस्ट्री विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। डॉ मुनिन चेन नेशनल चुंग हिंग यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल अफेयर के वाइस प्रेसिडेंट और ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल पॉलिसीज, ताइचुंग, ताइवान में प्रोफेसर हैं।

    सीटीए के अधीन कार्यरत तिब्बत नीति संस्थान के पर्यावरण और विकास डेस्क के प्रमुख श्री टेम्पा ग्यालत्सेन ने ‘द तिब्बती प्लेटू एंड इट्स करेंट एनवायरमेंट सिचुएशन’ विषय पर एक परिचर्चा रखी।

    अंत में जेएनयू में पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र में चीनी अध्ययन केंद्र के अध्यक्ष और प्रोफेसर श्रीकांत कोंडापल्ली ने स्काइप के माध्यम से ‘एशिया एंड एस्पेशिएली इंडियाज रोल ऑन तिब्बत्स इशू’ विषय पर अपनी बात रखी।

    दूसरे दिन के पैनल चर्चा के संक्षिप्त सत्र की अध्यक्षता ऑस्ट्रेलियाई संसद के सदस्य माननीय माइकल डेंबी ने की। माननीय सांसदों ने इस विषय पर अपने विचार और सुझाव साझा करके सक्रिय भागीदारी की।

    तिब्बत पर पिछले छह विश्व संसदों के सम्मेलन दिल्ली, भारत (1994), विनियस, लिथुआनिया (1995), वाशिंगटन डीसी, अमेरिका (1997), एडिनबर्ग, स्कॉटलैंड (2005), रोम, इटली (2009) और ओटावा, कनाडा (2012) में आयोजित किए गए।

    रीगा में सम्मेलन का आयोजन विभिन्न देशों के सांसदों से अधिक समर्थन हासिल करने और परमपावन दलाई लामा और चीनी नेताओं के साथ बातचीत के माध्यम से तिब्बत मुद्दे को हल करने के संभावित तरीकों का आकलन करने के लिए किया गया था।

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