• हेलीकॉप्टर दुर्घटना में खांडू की मौत, ईटानगर लाया जाएगा शव

    ईटानगर/नई दिल्ली, 5 मई। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री दोरजी खांडू नहीं रहे। हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। चार दिन पहले खांडू को लेकर लापता हुआ हेलीकॉप्टर दुर्घटनास्त हो गया था। इस दुर्घटना में मुख्यमंत्री सहित उसमें सवार सभी पांच लोगों की मौत हो गई। शवों को हेलीकॉप्टर के जरिये गुरुवार को ईटानगर लाया जाएगा। दुर्गम पहाड़ियों के बीच दुर्घटनास्थल पर बचाव कर्मियों के साथ पहुंचे खांडू के परिजनों ने उनके शव की पहचान की। हालांकि चार अन्य शव बुरी तरह क्षत-विक्षत तथा जले हुए थे, जिसकी वजह से उनकी पहचान नहीं हो पाई। खांडू की मौत की पुष्टि करते हुए पूर्वोत्तर मामलों के केंद्रीय मंत्री बी. के. हांडिक ने बुधवार शाम पत्रकारों से बातचीत में कहा, “मुख्यमंत्री के शव को निकालने में कठिनाई आ रही है क्योंकि वहां भारी बारिश हो रही है।” इससे पहले, पुलिस ने बताया कि मुख्यमंत्री के परिवार के कुछ सदस्य सुरक्षा कर्मियों तथा स्थानीय अधिकारियों के साथ चार घंटे की पैदल यात्रा के बाद लोबोतंग के पास दुर्घटनास्थल पर पहुंचे। हेलीकॉप्टर का मलबा बुधवार को ही सुबह 10 बजे देखा गया था। एक अधिकारी ने आईएनएस को बताया, “कुछ परिजनों ने मुख्यमंत्री के क्षत-विक्षत शव की पहचान की। सूचना के अनुसार चार अन्य शव बुरी तरह क्षत-विक्षत और जली हुई अवस्था में थे, जिनकी पहचान नहीं हो पाई।” केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने इससे पहले नई दिल्ली में कहा था कि दुर्घटनास्थल की पहचान कर ली गई है और कुछ शव देखे गए हैं। सेना का एक दल तवांग जिले में हेलीकॉप्टर का मलबा मिलने वाले स्थान के लिए रवाना हो गया है। करीब 96 घंटे तक चले तलाशी अभियान के बाद बुधवार सुबह करीब 10 बजे खोजी दल ने सुदूर लोबोतंग क्षेत्र में हेलीकॉप्टर का मलबा पाया। मुख्यमंत्री खांडू को तवांग से ईटानगर ले जा रहा पवन हंस कम्पनी का हेलीकॉप्टर एएस 350 बी-3 शनिवार सुबह 9.50 बजे लापता हो गया था। हेलीकॉप्टर के पायलट से आखिरी सम्पर्क उड़ान भरने के करीब 20 मिनट बाद हुआ था। इस समय हेलीकॉप्टर सेला दर्रे के करीब 13,700 फुट की ऊंचाई पर था। हेलीकॉप्टर में दो पायलट और मुख्यमंत्री तथा उनके निजी सुरक्षा अधिकारी सहित तीन यात्री थे। इनमें कांग्रेस विधायक सेवांग धोनदुप की छोटी बहन येशमी लामू भी थीं। ग्रामीणों ने ढूंढ़ा खांडू के हेलीकॉप्टर का मलबा : अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ लापता हुए हेलीकॉप्टर को ढूंढ़ निकालने में हवाई सर्वे और उपग्रह के चित्र नाकाम रहे, जबकि अप्रशिक्षित तथा बिना किसी उपकरण के स्थानीय लोगों की टीम ने बुधवार सुबह मलबे को ढूंढ निकाला। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल के पूर्वी क्षेत्र के प्रमुख एम. एस. भुर्जी ने कहा, “हवाई सर्वेक्षण तथा उपग्रह से मिले चित्रों के आधार पर हम सेला दर्रे के दक्षिण-पश्चिम इलाके में अभियान केंद्रित कर रहे थे। लेकिन स्थानीय लोगों ने मलबा सेला के उत्तर-पूर्व में ढूंढ़ निकाला।” उन्होंने कहा, “मलबा न तो किसी सुरक्षा बल और न ही हवाई सर्वेक्षण द्वारा ढूंढ़े गए हैं, बल्कि स्थानीय लोगों ने इसे ढूंढ़ा है।” उन्होंने कहा कि इस काम में जुटे स्थानीय लोग प्रशिक्षित नहीं थे और न ही उनके पास कोई ऐसा उपकरण था कि वे खोज से समन्वय कर सकें। भुर्जी के अनुसार, दुर्घटनास्थल से शवों को किसी ऐसे स्थान पर ले जाना काफी कठिन काम होगा, जहां से उन्हें हेलीकॉप्टर के जरिये दूसरी जगह ले जाया जा सके। यह घने जंगलों वाला और जोखिमभरा क्षेत्र है। उन्होंने कहा, “इसका निर्णय दिरांग और ईटानगर में आपदा प्रबंधन टीम को लेना है। लोगों ने मलबा ढूंढ़ निकाला है, हमारे लोग (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) कयेला के लिए रवाना हो गए हैं और स्थिति का मूल्यांकन करेंगे।” बेहतर प्रदर्शन करने वाले मुख्यमंत्रियों में थे शुमार : प्रदर्शन के मामले में खांडू देश के बेहतरीन मुख्यमंत्रियों की सूची में शुमार थे। उनके निधन से अरुणाचल प्रदेश की राजनीति में न सिर्फ एक शून्य पैदा हो गया है बल्कि उनके जैसे कुशल प्रशासक की कमी आने वाले लम्बे समय तक पूर्वोत्तर के इस राज्य को खलेगी। खांडू के मंत्रिमंडल के सहयोगी तो उनके निधन को निजी नुकसान मानते हैं। राज्य के ऊर्जा मंत्री जारबोम गामलिन ने कहा, “मैं तो कहूंगा वह अरुणाचल के अब तक के सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री थे। वह ऐसे व्यक्ति थे जिसकी व्यवख्या एक दूरदर्शी नेता के रूप में होती थी।” राजनीति में आने से पहले खांडू भारतीय सेना के खुफिया विभाग में कार्यरत थे। सात साल की अपनी इस सेवा के दौरान बांग्लादेश के खिलाफ 1971 में हुए युद्ध में खुफिया विभाग में सराहनीय योगदान के लिए उन्हें पुरस्कार से भी नवाजा गया था। पहली बार उन्होंने 1990 में राजनीति में कदम रखा और अरुणाचल प्रदेश विधानसभा के लिए हुए पहले चुनाव में निर्विरोध चुने गए। इसके बाद 1995 में हुए विधानसभा चुनाव में वह फिर से चुने गए और उन्हें कोऑपरेशन मंत्री बनाया गया। नौ अप्रैल 2007 को गेगांग अपांग के बाद उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया। वर्ष 2009 में वह एक बार फिर विधानसभा चुनाव जीत गए और लगातार दूसरी बार राज्य की जिम्मेदारी उनके कंधे पर सौंपी गई। खांडू को सड़कों का जाल बिछाने और राज्य में ऊर्जा क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए हमेशा याद किया जाएगा। गृह मंत्री ताको दाबी ने कहा, “उन्होंने ही राज्य में सड़कों के निर्माण की दिशा में तेजी से कदम उठाए और राज्य को ऊर्जा क्षेत्र के केंद्र के रूप में विकसित किया।”

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